SBI Car Loan Fraud: ED की छापेमारी, BMW–Mercedes समेत लग्जरी कारें जब्त
SBI Car Loan Fraud: ED की बड़ी कार्रवाई, पुणे में छापेमारी; BMW–Mercedes जैसी लग्जरी कारें जब्त
नई दिल्ली: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के कार-लोन से जुड़े एक बड़े कथित धोखाधड़ी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पुणे और आसपास के इलाकों में शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई की। जांच एजेंसी ने छापेमारी के दौरान BMW, Mercedes, Land Rover और Volvo जैसी कई लग्जरी कारों को जब्त किया है।
यह कार्रवाई उस मामले में की गई है, जिसमें आरोप है कि फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर करोड़ों रुपये के कार-लोन मंजूर कराए गए थे।
क्या है पूरा मामला?
ED की शुरुआती जांच में पता चला है कि कार-लोन दिलवाने की प्रक्रिया में शामिल कुछ लोगों ने मिलकर लोन हासिल करने के लिए गलत और अधूरे दस्तावेज़ इस्तेमाल किए।
कहा जा रहा है कि—
- आय प्रमाण पत्र बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए,
- KYC दस्तावेज़ सही तरीके से जांचे नहीं गए,
- और कुछ मामलों में गाड़ियों की कीमत भी वास्तविक से कहीं ज्यादा बताई गई।
इन सबके दम पर महंगी कारों के लिए लोन मंजूर करवाए गए।
किन-किन पर शक?
ED की जांच में यह बात सामने आई है कि इस फ्रॉड में कुछ लोन एजेंटों, कार डीलरों, और SBI के एक पूर्व ब्रांच मैनेजर की भूमिका संदिग्ध है।
एजेंसी का मानना है कि यह सब मिलकर लोन की मंजूरी की प्रक्रिया को गलत दिशा में ले गए, जिससे बैंक को भारी नुकसान हुआ।
कहाँ हुई छापेमारी?
जांच के सिलसिले में ED ने पुणे में लगभग 12 लोकेशंस पर सर्च ऑपरेशन चलाया।
इन जगहों से—
- कार-लोन के दस्तावेज़,
- डिजिटल रिकॉर्ड,
- और संदिग्ध लेन-देन से जुड़े प्रमाण
जप्त किए गए हैं। जब्त की गई लग्जरी कारों की कुल कीमत भी करोड़ों में बताई जा रही है।
कैसे किया गया फ्रॉड?
जांच एजेंसी के अनुसार, यह पूरा फर्जीवाड़ा “फर्जी पात्रता दिखाकर” कार-लोन स्वीकृत कराने पर आधारित था।
लोन लेने वाले लोगों की असल आय की तुलना में बहुत अधिक राशि के लोन मंजूर कराए गए, और बाद में इन वाहनों को बेचकर या ट्रांसफर कर लाभ कमाया गया।
PMLA के तहत कार्रवाई जारी
ED ने इस मामले में Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत कार्रवाई की है।
जांच आगे बढ़ रही है और आने वाले समय में इससे जुड़े और लोगों पर कार्रवाई होने की संभावना है।
ग्राहकों पर इसका क्या असर?
इस घटना का आम बैंक ग्राहकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
यह मामला केवल गलत दस्तावेजों के जरिए लोन स्वीकृत कराने से जुड़ा है और ग्राहकों की जमा राशि या खातों पर इसका कोई प्रभाव नहीं होगा।
निष्कर्ष
SBI कार-लोन फ्रॉड मामला बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता और दस्तावेज़ सत्यापन की महत्वता को फिर से सामने लाता है।
ED की छापेमारी से यह साफ है कि एजेंसी इस तरह के मामलों को लेकर सख्त है और आने वाले दिनों में जांच में और भी खुलासे सामने आने की संभावना है।
