राजस्थान पंचायत चुनाव 2025–26: हाईकोर्ट का आदेश, 3400 नई पंचायतें और परिसीमन प्रक्रिया पर पूरी रिपोर्ट
राजस्थान पंचायत चुनाव 2025–26: हाईकोर्ट का आदेश और सरकार की तैयारी तेज — पूरी रिपोर्ट
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| राजस्थान पंचायत चुनाव 2025–26 पर हाईकोर्ट के आदेश और 3400 नई पंचायतों के पुनर्गठन से जुड़ी बड़ी खबर। |
जयपुर।
राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनाव को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। राजस्थान उच्च न्यायालय ने 13 नवंबर 2025 को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव अनिवार्य रूप से सम्पन्न किए जाएं।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि परिसीमन प्रक्रिया 31 दिसंबर 2025 तक हर हाल में पूरी होनी चाहिए। इसके साथ ही, अदालत ने पंचायत चुनाव स्थगित करने संबंधी सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है और कहा है कि लोकतांत्रिक ढांचा बनाए रखने के लिए निर्धारित समय पर चुनाव कराना जरूरी है।
सरकार की बड़ी तैयारी: 41 जिलों में पंचायतों का पुनर्गठन पूरा
हाईकोर्ट के आदेश के तुरंत बाद राजस्थान सरकार ने चुनावी प्रक्रिया को गति देने के लिए बड़े कदम उठाए हैं।
21 नवंबर 2025 को राज्य सरकार ने राजस्थान के 41 जिलों में पंचायतों के पुनर्गठन (Restructuring) की घोषणा की है।
पुनर्गठन के मुख्य बिंदु:
- राज्य में लगभग 3,400 नई पंचायतों का गठन
- अब कुल पंचायतों की संख्या 14,000 के पार
- जयपुर जिले में 20 पंचायत समितियों का पुनर्गठन
- ग्राम पंचायतों की सीमाओं में परिवर्तन
- प्रशासनिक और विकासात्मक कार्यों की गति बढ़ने की उम्मीद
सरकार का दावा है कि यह पुनर्गठन ग्रामीण स्तर पर प्रशासनिक दक्षता बढ़ाएगा और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
चुनाव प्रक्रिया के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित
राजस्थान सरकार ने हाईकोर्ट के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए एक तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति बनाई है। यह समिति निम्न कार्यों की ज़िम्मेदारी संभालेगी:
- परिसीमन प्रक्रिया को निर्धारित समय पर पूरा करना
- मतदाता सूचियों का अद्यतन
- नए चुनाव चिन्ह आवंटन
- चुनाव कर्मियों का प्रशिक्षण
- संपूर्ण चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करना
सरकार का कहना है कि पंचायत चुनावों में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होने दी जाएगी।
चुनाव समय पर कराने पर सरकार की प्राथमिकता
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद राजस्थान सरकार ने स्पष्ट किया है कि पंचायत चुनाव समय पर कराना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
चुनाव न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया है, बल्कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय शासन प्रणाली मजबूत होती है।
चुनाव समय पर होने से:
- पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं की गति तेज होगी
- स्थानीय नेतृत्व को सशक्त बनाया जा सकेगा
- ग्रामीण जनता को सेवाओं का सीधा लाभ मिलेगा
हाईकोर्ट द्वारा चुनाव स्थगन याचिकाओं को खारिज करने के बाद अब यह स्पष्ट संकेत है कि राजस्थान में पंचायत चुनाव टालना संभव नहीं है और राज्य सरकार को निर्धारित समयसीमा में यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक प्रभाव भी बड़े
पंचायत चुनाव का महत्व केवल राजनीतिक नहीं है।
यह आयोजन ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक संरचना पर गहरा प्रभाव डालता है।
नए परिसीमन और पुनर्गठन के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि:
- पंचायत व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित होगी
- योजनाओं की मॉनिटरिंग में सुधार होगा
- जनप्रतिनिधियों को अधिक स्पष्ट अधिकार और जिम्मेदारी मिलेगी
राज्य के लिए यह चुनाव लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने का बड़ा अवसर माना जा रहा है।
