IFS गौरव गर्ग निलंबित: भिलवाड़ा के आरक्षित वन में अवैध पेड़ कटाई पर सरकार की बड़ी कार्रवाई
भिलवाड़ा में आरक्षित वन क्षेत्र में अवैध पेड़-कटाई: IFS अधिकारी गौरव गर्ग का निलंबन
परिचय
भारत में वन क्षेत्र-संरक्षण एक संवेदनशील विषय है। हाल ही में राजस्थान के भिलवाड़ा जिले में आरक्षित वन क्षेत्र में व्यापक अवैध पेड़-कटाई का मामला सामने आया है, जिसके चलते राज्य सरकार ने IFS अधिकारी गौरव गर्ग को निलंबित करने का निर्णय लिया है। यह घटना वन क्षेत्र संरक्षण की चुनौतियों को फिर से उजागर करती है।
घटना का विवरण
भिलवाड़ा के आरक्षित वन क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान पाया गया कि पेड़ों की अनुमति-रहित कटाई हुई है। इस अवैध गतिविधि में सरकार और वन विभाग की नजरंदाज़ी पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है। इस घटना के प्रकाश में, राजस्थान सरकार ने कार्रवाई की दिशा में कदम उठाया है।
विशेष रूप से, अधिकारी गौरव गर्ग (IFS) को निलंबित किया गया है। यह निलंबन इस बात का संकेत है कि अवैध वन कटाई के मामलों में शासन-प्रशासन गंभीर है।
क्या यह सिर्फ एक घटना है या संकेत?
यह मामला सिर्फ एक स्थानीय अदालत-जांच का विषय नहीं रह गया है। बल्कि यह राज्य में वन सुरक्षा, पर्यावरण दृढ़ता तथा शासन-जवाबदेही के दृष्टिकोण से संकेत देता है कि –
- आरक्षित वन क्षेत्रों में सक्रिय निगरानी, मॉनिटरिंग व तुरंत कार्रवाई की आवश्यकता है।
- वन विभाग में अधिकारी-कर्मचारी तथा स्थानीय सरकारी निकायों की जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए।
- अवैध कटाई जैसी गतिविधियाँ न सिर्फ प्राकृतिक संसाधनों को प्रभावित करती हैं बल्कि सामाजिक-आर्थिक रूप से वन पर निर्भर समुदायों को भी नुकसान पहुँचाती हैं।
आगे क्या करने की जरूरत है?
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स्वीकृत निरीक्षण-तंत्र : वन क्षेत्र में नियमित जांच, सैटेलाइट एवं ड्रोन ट्रैकिंग से पेड़ों की कटाई पर नजर रखी जानी चाहिए।
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लोक सहभागिता : स्थानीय लोगों, ग्राम पंचायतों तथा नागरिक समूहों को वन संरक्षण में सक्रिय किया जाना चाहिए ताकि सूचना तंत्र सुदृढ़ हो।
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प्रशासनिक जवाबदेही : इस तरह के मामलों में निष्पक्ष जांच हो, दोषी को निर्णय-सहित दंड मिले, और अधिकारीगत-प्रशासनिक सुधार हो।
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जागरूकता अभियान : ब्लॉग, सोशल मीडिया, क्षेत्रीय समाचार माध्यमों द्वारा वन संरक्षण की महत्ता को लोगों तक पहुँचाना बेहद जरूरी है।
निष्कर्ष
भिलवाड़ा में हुई अवैध पेड़-कटाई और उसके बाद गौरव गर्ग के निलंबन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वन संरक्षण सिर्फ नीति-कागजों में नहीं होगा, बल्कि सक्रिय कार्रवाई, निगरानी व जवाबदेही से संभव है। यदि हम वनों को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो हमें नियोजन-क्रियान्वयन-अनुपालन के त्रिकोण को बेहतर करना होगा।
