झुंझुनूं के बांसियाल में 4500 साल पुरानी सभ्यता के अवशेष मिले, खेतड़ी में उत्खनन से बड़ा खुलासा

झुंझुनूं के बांसियाल (खेतड़ी) में 4500 साल पुरानी सभ्यता के अवशेष मिले, पुरातत्व विभाग ने उत्खनन में किए बड़े खुलासे

बांसियाल, खेतड़ी, झुंझुनूं में मिली 4500 साल पुरानी सभ्यता के अवशेषों की उत्खनन स्थल की तस्वीर


झुंझुनूं/खेतड़ी, 26 नवंबर 2025: राजस्थान के झुंझुनूं जिले के खेतड़ी तहसील के बांसियाल गांव में पुरातत्व विभाग ने एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक खोज की है। उत्खनन के दौरान यहां लगभग 4500 वर्ष पुरानी सभ्यता के अवशेष मिले हैं, जिससे यह क्षेत्र प्राचीन मानव बसावट और सांस्कृतिक धरोहर के लिहाज़ से अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, बांसियाल में मिली संरचनाएँ और अवशेष संकेत देते हैं कि यह क्षेत्र ताम्र-पाषाणिक काल (Chalcolithic Era) में एक संगठित और समृद्ध बस्ती रहा होगा।


🔹 क्या मिला उत्खनन में?

पुरातत्व विभाग की टीम को बांसियाल गांव में खुदाई के दौरान कई महत्वपूर्ण वस्तुएँ मिलीं, जिनमें शामिल हैं—

  • प्राचीन घर की संरचना (House Structure)
  • चूने और मिट्टी से बनी दीवारों के अवशेष
  • तांबे की अंगूठी और धातु के छोटे औजार
  • हड्डी से बने उपकरण (Bone Tools)
  • अर्ध-कीमती पत्थरों (Semi-Precious Stones) के मनके
  • लाल रंग के मृद्भांड (Red Pottery)
  • आभूषणों के अवशेष और सजावटी वस्तुएँ

ये सभी तत्व बताते हैं कि यहाँ रहने वाले लोग विकसित शिल्पकला, धातु उपयोग और व्यापारिक गतिविधियों में सक्षम थे।


🔹 हड़प्पा सभ्यता से संभावित संबंध

विशेषज्ञों का मानना है कि बांसियाल में मिली सामग्री का प्रारंभिक विश्लेषण इन्हें हड़प्पा और ताम्रपाषाणिक संस्कृति से जोड़ता है। हालांकि कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला है, लेकिन—

  • मिट्टी के बर्तनों की बनावट
  • पत्थर के मनकों का आकार
  • धातु के उपयोग
  • आवासीय संरचनाएँ

—इन सब में हड़प्पा सभ्यता की शैली और तकनीक से साम्य दिखता है।

पुरातत्व विभाग आगे विस्तृत कार्बन डेटिंग और लेयर विश्लेषण करवाएगा, जिससे सभ्यता की उम्र और सटीक सांस्कृतिक पहचान और स्पष्ट होगी।


🔹 क्या बताती है यह खोज?

यह खोज साबित करती है कि:

  • खेतड़ी क्षेत्र 4500 साल पहले भी मानव बसावट और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था।
  • यह क्षेत्र केवल खनिज संपदा (तांबा) के लिए प्राचीन काल से महत्वपूर्ण नहीं था, बल्कि संगठित शहरी एवं ग्रामीण जीवन का केंद्र भी रहा है।
  • बांसियाल में मिली संरचनाएँ इंगित करती हैं कि यहाँ स्थायी मकान, सामुदायिक जीवन, और शायद लंबी दूरी के व्यापार की व्यवस्था भी मौजूद थी।


🔹 स्थानीय प्रशासन और पुरातत्व विभाग का बयान

पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने कहा:

"बांसियाल में मिली खोज राजस्थान के उत्तरी क्षेत्र के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ती है। प्रारंभिक जांच में यह 4500 वर्ष पुरानी सभ्यता का हिस्सा प्रतीत होती है। आगे की खुदाई और वैज्ञानिक परीक्षण इसे और स्पष्ट करेंगे।"

स्थानीय प्रशासन ने भी उत्खनन कार्य में सहयोग और सुरक्षा देने के निर्देश जारी किए हैं।


🔹 आगे क्या होगा?

  • उत्खनन कार्य को और विस्तार दिया जाएगा
  • वैज्ञानिक डेटिंग (C14, TL Test) की जाएगी
  • संरक्षित क्षेत्र घोषित करने पर विचार
  • संभावित संग्रहालय / प्रदर्शनी की योजना

आगामी महीनों में इस स्थल से और भी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक जानकारी मिलने की संभावना है।

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